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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

झारखंड में जल जीवन और PM आवास योजना में बड़ा खेल, अयोग्य ठेकेदारों को 159 करोड़ रुपये के टेंडर, 28% गरीब आवास से वंचित

झारखंड में केंद्र सरकार की दो अत्यंत महत्त्वपूर्ण योजनाओं—जल जीवन मिशन (JJM) और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G)—में बड़े पैमाने पर धांधली और प्रबंधकीय कमियों का मामला उजागर हुआ है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नई लेखा परीक्षा रिपोर्ट में टेंडर आवंटन की प्रक्रियाओं में गड़बड़ी, अयोग्य ठेकेदारों पर मेहरबानी और पात्र गरीबों की अनदेखी को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने रखे गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नियमों को दरकिनार कर पसंदीदा संवेदकों को काम सौंपे गए, वहीं दूसरी ओर हजारों जरूरतमंद परिवार योजना के लाभ से दूर रह गए।

टेंडर में केवल दो संवेदकों ने लिया भाग

सीएजी की जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा टेंडर आवंटन में निर्धारित नियमों का स्पष्ट उल्लंघन किया गया। सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े कार्यों के आधार पर ही निविदा क्षमता (Tender Capacity) तय करने का प्रावधान था। हालांकि, जांच में सामने आया कि एक ठेकेदार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान मात्र 5.60 करोड़ रुपये का ही सिविल कार्य पूरा किया था, जिसके अनुसार उसकी टेंडर क्षमता शून्य बैठती थी।

इसके बावजूद नियमों को नजरअंदाज करते हुए उस ठेकेदार को 7 अलग-अलग टेंडरों के जरिए 54.05 करोड़ रुपये का काम थमा दिया गया। इस प्रकार अयोग्य संवेदकों को कुल मिलाकर 159.36 करोड़ रुपये मूल्य के ठेके दे दिए गए।

28 फीसदी पात्र लाभुकों को नहीं मिला पीएम आवास

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के निष्पादन और पारदर्शिता पर भी सीएजी रिपोर्ट ने कड़े सवाल उठाए हैं। राज्य स्तर पर कुल 22.34 लाख योग्य ग्रामीण परिवारों को आवास के लिए चिह्नित किया गया था, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा केवल 16.02 लाख मकानों का ही लक्ष्य स्वीकृत किया गया। इसके परिणामस्वरूप, लगभग 28 प्रतिशत (6.32 लाख) अत्यंत जरूरतमंद परिवार पक्के मकान के अधिकार से वंचित रह गए।

दूसरी तरफ, प्रतीक्षा सूची के प्रबंधन में भारी गड़बड़ी देखी गई और लगभग 2.90 लाख ऐसे लोगों के नाम सूची में दर्ज कर दिए गए जो तय मापदंडों पर अपात्र थे। हालांकि बाद में जांच प्रक्रिया के दौरान इन नामों को हटाया गया। इसके अलावा, राज्य को ओडीएफ घोषित किए जाने के बावजूद, निर्मित कुल पीएम आवासों में से लगभग 8 प्रतिशत घरों में शौचालय का निर्माण ही नहीं कराया गया था, जो योजना की भौतिक निगरानी पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।

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