Categories

November 3, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

CHILGU : चिलगु पुनर्वास स्थल में सरकारी भवन ध्वस्त कर अवैध निर्माण, लाखों की सामग्री गायब…

बिष्णु पद महापात्र 📲 94711 02055 (wa)

सरायकेला (चांडिल), 09 अगस्त : चिलगु पुनर्वास स्थल में एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है जहाँ बिना विभागीय स्वीकृति के एक सरकारी भवन को अवैध रूप से ध्वस्त कर उसी स्थल पर पुनर्वास एवं अंचल कार्यालय, चांडिल से स्वीकृति लिए बिना नया स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया। ध्वस्त किए गए भवन की कीमती निर्माण सामग्री जैसे – ईंट, लोहे की एंगल  तथा एसबेस्टस, लोहे की चैनल, रॉड आदि — विभाग को नियमानुसार सुपुर्द करने की बजाय रहस्यमय तरीके से गायब कर दी गई। जिसकी विभाग को भनक तक नहीं लगा। 

सूर्योदय संवाद चैनल द्वारा 29 जुलाई को Public App पर इस प्रकरण को प्रमुखता से प्रसारित किया गया, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मामला तब और गंभीर हो गया जब 28 जुलाई को भू-अर्जन एवं पुनर्वास कार्यालय, आदित्यपुर से अपर निदेशक के निर्देश पर मापक विश्वजीत सिंह एवं जंजीरवाहक लक्ष्मीकांत महतो ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।

जाँच दल के स्थल पर पहुँचने की भनक लगते ही ठेकेदार निर्माण कार्य बंद कराकर कर्मचारियों के साथ निर्माण कार्यस्थल से भाग गया। जाँच में यह स्पष्ट हुआ कि न केवल सरकारी भवन को बिना अनुमति के तोड़ा गया, बल्कि उसकी सामग्री भी गायब कर दी गई है। जाँच दल ने यह भी पुष्टि की कि ठेकेदार ने भवन निर्माण हेतु पुनर्वास कार्यालय से कोई अनुमति प्राप्त नहीं की थी।

इस खबर के प्रसारण के बाद क्षेत्र के भू-माफिया और दलालों में अफरा-तफरी मच गई। आरोप है कि इस अवैध कृत्य को छिपाने और अपनी मनमानी पर पर्दा डालने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से झूठी कहानियाँ फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, और इस प्रकरण को उजागर करने वालों को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।

इस विषय में अखिल भारतीय मानवाधिकार संघ के सक्रिय सदस्य एवं चिलगु पुनर्वास स्थल के निवासी निर्मल गोप ने प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि वह स्वयं चांडिल डैम से पूर्ण डूबी प्रभावित विस्थापित हैं एवं पुनर्वास स्थल की नींव के समय से वहाँ निवासरत हैं। उन्होंने कहा कि – “जो भी व्यक्ति, चाहे वह ठेकेदार हो, भू-माफिया हो या दलाल, सरकारी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, तो उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।”

उन्होंने बताया कि ध्वस्त भवन में उपयोग की गई सामग्री उच्च गुणवत्ता की थी, जिसकी कीमत लाखों में आँकी जा सकती है, और वर्तमान बाजार दर के अनुसार इसकी कीमत पाँच गुना अधिक हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भवन सामग्री को विभाग को सौंपने के बजाय दलालों के साथ मिलीभगत कर उसे अवैध रूप से बेच दिया गया, जो एक गंभीर अपराध है और इसकी निष्पक्ष जाँच अनिवार्य है।

निर्मल गोप ने विभाग पर भरोसा जताते हुए कहा कि दोषियों पर निश्चित ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने प्रशासन को हरसंभव सहयोग देने की बात भी कही।

उन्होंने आगे बताया कि – “पुनर्वास स्थल चिलगु में भू-माफिया और दलाल मिलकर गैर-विस्थापितों को भारी रकम लेकर बसाने का षड्यंत्र कर रहे हैं। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा हस्ताक्षरयुक्त आवेदन पूर्व में विभाग को सौंपा गया था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।”

यह मामला अत्यंत संवेदनशील और विस्थापितों के हितों से जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते विभाग द्वारा निष्पक्ष जाँच और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो सरकारी संपत्ति की इस लूट और नियमों की अवहेलना से प्रशासन की साख पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है।

इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि यदि इसकी निष्पक्ष जाँच हो तो स्थानीय भू-माफिया, दलालों के साथ-साथ बिना अनुमति के सरकारी भवन ध्वस्त कर निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार पर भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और उन्हें जेल भेजना तय है।

About Author