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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

अशोक चक्रधर: युवा, कविता और साहित्य पर बोले

पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार एवं हास्य-व्यंग्य कवि अशोक चक्रधर ने युवाओं, कविता की प्रासंगिकता और बदलते दौर में भाषा एवं साहित्य की भूमिका पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए। प्रस्तुत हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश:

सवाल : आज के दौर में हास्य-व्यंग्य की भूमिका क्या है?

अशोक चक्रधर : वर्तमान समय में सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन में बदलाव की रफ्तार काफी तेज है। निरंतर भागदौड़, काम के मानसिक दबाव और सूचनाओं की बौछार के बीच हास्य लोगों के लिए मानसिक सुकून और राहत का काम करता है। हालांकि, सच्चा हास्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होता, बल्कि व्यंग्य के जरिए यह समाज की कमियों और विसंगतियों पर करारा प्रहार कर आईना दिखाने का काम भी करता है।

सवाल : नई पीढ़ी साहित्य और कविता से दूर होती जा रही है, इसे कैसे देखते हैं?

अशोक चक्रधर : यह सोच पूरी तरह उचित नहीं है कि आज के युवा साहित्य या कविता से विमुख हो रहे हैं। वास्तव में, नए दौर की पीढ़ी के पास अपनी बात कहने और अभिव्यक्त करने के डिजिटल और आधुनिक माध्यम उपलब्ध हैं। युवा आज भी कविताएं पढ़ और लिख रहे हैं, लेकिन उनका मंच और तरीका बदल चुका है। युवाओं को अपने विचारों को व्यक्त करने और सवाल पूछने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

सवाल : हिंदी भाषा के वर्तमान स्वरूप को लेकर आपकी क्या राय है?

अशोक चक्रधर : हिंदी आज केवल देश तक सीमित न रहकर वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है। किसी भी भाषा की जीवंतता इस बात पर निर्भर करती है कि वह समय और परिवेश के अनुसार खुद में कितना बदलाव लाती है। भाषा यदि आम लोगों की बोलचाल को सहजता से आत्मसात करती है, तो उसका प्रसार और प्रभाव दोनों बढ़ता है।

सवाल : पद्मश्री जैसे सम्मान मिलने के बाद आपकी जिम्मेदारियां बढ़ी हैं?

अशोक चक्रधर : किसी भी रचनाकार के लिए राष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार बड़ी प्रेरणा होते हैं, लेकिन किसी लेखक या कवि की वास्तविक पहचान उसकी कृतियों से होती है। निश्चित रूप से बड़ा सम्मान मिलने के बाद समाज और साहित्य जगत के प्रति नैतिक उत्तरदायित्व और अधिक बढ़ जाता है ताकि अपने लेखन से सकारात्मक प्रभाव डाला जा सके।

सवाल : आज के कवि सम्मेलनों में क्या अंतर देखते हैं?

अशोक चक्रधर : समय के साथ मंच संचालन और प्रस्तुतीकरण के तरीकों में बदलाव आया है, लेकिन कविता का मूल तत्व आज भी वही है। यदि कोई काव्य रचना रस से परिपूर्ण है, साहित्यिक और शास्त्रीय मानकों पर खरी उतरती है तथा श्रोता को मानसिक ऊर्जा प्रदान करती है, तो वह श्रेष्ठ कविता ही कहलाएगी।

सवाल : युवाओं के लिए आपका संदेश क्या है?

अशोक चक्रधर : युवाओं को मेरा यही संदेश है कि वे अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और रचनात्मक सोच से हमेशा जुड़े रहें। उन्हें समाज को बेहतर बनाने के लिए सार्थक सवाल पूछने चाहिए और अपनी रचनात्मक क्षमता का सही दिशा में उपयोग करना चाहिए।

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