Seraikella : टेंगाडीह विद्यालय के शिक्षकों की लापरवाही से परीक्षा से वंचित हुए दर्जनभर छात्र, समाजसेवी अवधेश मुर्मू ने की जांच और कार्रवाई की मांग…..

. बिष्णु पद महापात्र 📲 9471102055 (wa)
सरायकेला : सरायकेला-खरसवाँ जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय टेंगाडीह से एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां शिक्षकों की चूक के कारण इस वर्ष आयोजित 8वीं बोर्ड परीक्षा से लगभग एक दर्जन छात्र-छात्राएं वंचित रह गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा आयोजित 2 मार्च को 8वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए समयावधि के भीतर परीक्षार्थियों का पंजीकरण अनिवार्य था। आरोप है कि विद्यालय के शिक्षकों द्वारा निर्धारित समयावधि के भीतर विद्यार्थियों के आवेदन ऑनलाइन जमा नहीं किए गए, जिसके चलते इन छात्रों के प्रवेश पत्र जारी नहीं हो सके। परिणामस्वरूप वे इस वर्ष परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए।
इस घटना से प्रभावित छात्रों में चित्रा सिंह, उत्तम सिंह, प्रतिमा सिंह, उर्मिला दास, जीतवाहन सिंह, चंपारानी सिंह, प्रियंका मुर्मू, वनबिहारी सिंह, सुशील हांसदा, शुभम मांझी और मनोज सिंह शामिल हैं। परीक्षा से वंचित होने के कारण छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी निराशा और आक्रोश देखा जा रहा है।
अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालय में तीन सरकारी शिक्षक पदस्थापित होने के बावजूद इतनी बड़ी लापरवाही होना चिंताजनक है। अभिभावक लखीराम सिंह ने बताया कि उनकी पुत्री प्रतिमा सिंह परीक्षा से वंचित होने के कारण मानसिक रूप से काफी आहत है और उन्होंने इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक सरसिज कुमार का वेतन अस्थायी रूप से रोक दिया है और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। वहीं, प्रधानाध्यापक ने इसे तकनीकी समस्या बताते हुए कहा कि निर्धारित समय में प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी, हालांकि उन्होंने विभाग को जवाब सौंप दिया है।
नीमडीह प्रखंड के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी संजय कुमार जोशी ने बताया कि यह चूक प्रधानाध्यापक की लापरवाही का परिणाम है। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और वेतन पर रोक लगाई गई है। साथ ही, वंचित छात्रों के लिए एक माह के भीतर विशेष परीक्षा आयोजित कराने की प्रक्रिया जारी है, ताकि उन्हें एक और अवसर मिल सके।
इधर, ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के समाजसेवी अवधेश मुर्मू ने घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी शिक्षकों की ऐसी लापरवाही गरीब और ग्रामीण छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी शिक्षकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि विभाग इस मामले में कितनी पारदर्शिता और सख्ती के साथ कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
