सरायकेला-खरसावां: खपत के अनुसार मिल रही बिजली, फिर भी अनियमित आपूर्ति से लोग परेशान

Seraikela News सरायकेला-खरसावां जिले में उमस भरी भीषण गर्मी के बीच बिजली की अघोषित और अनियमित कटौती ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। बिजली की इस लुकाछिपी के कारण उपभोक्ताओं में जहां एक तरफ भारी नाराजगी है, वहीं दूसरी तरफ जलापूर्ति बाधित होने से पेयजल का संकट भी गहरा गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गर्मी के बढ़ते ही बिजली विभाग की लापरवाही शुरू हो जाती है। थोड़ी सी भी तेज हवा चलने या बादलों के गरजने पर घंटों के लिए बिजली गुल कर दी जाती है।
इसके विपरीत, विद्युत विभाग का दावा है कि जिले को उसकी जरूरत के अनुसार पर्याप्त बिजली मिल रही है, इसलिए कटौती की कोई बात ही नहीं है।
जिला में 70 मेगावाट बिजली की है जरूरत आंकड़ों के अनुसार, सरायकेला-खरसावां जिले में वर्तमान में लगभग 60 से 70 मेगावाट बिजली की आवश्यकता है। विभाग का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के बावजूद इस मांग को पूरा किया जा रहा है। मामले को लेकर विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता (EE) लालजी महतो ने स्पष्ट किया कि जिले में बिजली की उपलब्धता भरपूर है। यदि कहीं कोई तकनीकी खराबी (फॉल्ट) आती है, केवल उसी स्थिति में मरम्मत कार्य के लिए थोड़ी देर आपूर्ति रोकी जाती है।
विभाग का दावा 20 से 21 घंटे मिलती है बिजली बिजली विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पर्याप्त लोड मिलने के चलते उपभोक्ताओं को रोजाना 20 से 21 घंटे तक बिजली की सप्लाई दी जा रही है। आंधी-तूफान के समय लाइनों में खराबी आने पर ही बिजली बंद होती है।
कार्यपालक अभियंता लालजी महतो ने यह भी कहा कि इस समस्या के पीछे उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी भी एक बड़ी वजह है। कई लोग कनेक्शन लेते समय केवल एक किलोवाट का भार (लोड) स्वीकृत कराते हैं, जबकि घरों में उससे कहीं ज्यादा बिजली के उपकरणों का उपयोग करते हैं। स्वीकृत लोड के आधार पर ही विभाग आगे बिजली की मांग तय करता है, लेकिन वास्तविक खपत अधिक होने के कारण वितरण प्रणाली (सिस्टम) पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे निर्बाध आपूर्ति में बाधा आती है। इसके अलावा, गर्मी के मौसम में खराब मौसम और वज्रपात की वजह से भी एहतियातन बिजली बंद करनी पड़ती है।
क्या कहते हैं लोग?
- सुमित चौधरी (भाजपा नेता व स्थानीय निवासी): बिजली की समस्या का सीधा असर पानी की आपूर्ति पर पड़ रहा है। ऐसे में जनता को बिजली और पानी दोनों का संकट एक साथ झेलना पड़ रहा है। विभाग मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी करता है, यही कारण है कि हल्की हवा चलने पर भी खंभे गिर जाते हैं।
- ललित चौधरी (व्यवसायी): पूर्व के जनप्रतिनिधियों ने बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसका खामियाजा आज यहां की जनता भुगत रही है। यदि समय रहते बड़े नेताओं ने प्रयास किए होते, तो सरायकेला में अब तक पावर ग्रिड बनकर तैयार हो चुका होता।
- लक्ष्मी देवी (गृहणी): इस चिपचिपी गर्मी में बार-बार बिजली कटने से घर का काम करना मुश्किल हो गया है। इसका सबसे बुरा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। रात के समय बिजली गुल होने से अंधेरे में जहरीले जीव-जंतुओं और सांप-बिच्छू का डर हमेशा बना रहता है।


