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November 3, 2026

Suryoday Samvaad

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100 डॉलर की ओर बढ़ता कच्चा तेल ? जानिए भारत पर कितना पड़ेगा असर

Crude Oil Rally: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तथा तेल उत्पादन या सप्लाई में बड़ी रुकावट आती है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं. इसका सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत जैसे तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है.

रिपोर्ट कहती है कि फिलहाल कीमत 75 से 95 डॉलर के बीच रह सकती है, लेकिन हालात बिगड़े तो यह तेजी से बढ़ सकती है. रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि होरमुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है. यह मार्ग विश्व के बड़े हिस्से के तेल निर्यात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. किसी भी प्रकार की नाकेबंदी या व्यवधान से ऊर्जा बाजार में तेज उछाल आ सकता है.

लंबा खिंचा संकट बढ़ा सकता है वैश्विक आर्थिक दबाव

आईसीआईसीआई बैंक ने आकलन किया है कि मौजूदा तनाव लगभग एक महीने तक जारी रह सकता है, हालांकि लंबे समय तक संघर्ष चलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. यदि संकट लंबा चलता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. विकास दर में गिरावट और महंगाई में बढ़ोतरी का जोखिम प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के लिए बढ़ सकता है.

भारत जैसे आयातक देशों पर संभावित असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जैसे शुद्ध तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई, आर्थिक विकास और चालू खाता घाटे पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं. अतीत में जब भी किसी बड़े तेल उत्पादक देश में संघर्ष हुआ है, तब तेल कीमतों में 10 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है. हालांकि एक से दो वर्ष की अवधि में कीमतों की दिशा उस समय की मांग-आपूर्ति स्थिति पर निर्भर करती है. इसलिए मौजूदा संकट के बाद मध्यम अवधि में कीमतों का रुख वैश्विक आर्थिक हालात और उत्पादन स्तर पर आधारित रहेगा.

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